गीता बाल संस्कार के बच्चों ने किया गीता सामुहिक पारायण जोधपुर। दार्शनिक संत चन्द्रप्रभ महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण जब जन्मे तब न तो क...
जोधपुर। दार्शनिक संत चन्द्रप्रभ महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण जब जन्मे तब न तो कोई थाली बजाने वाला था न कोई खुशियां और लड्ïडू बांटने वाला, पर फिर भी वे लड्ïडू गोपालजी बनकर जिंदगी भर औरों को खुशियां बांटते रहे। श्री कृष्ण ने धर्म को सरस बनाते हुए इंसानियत को हंसता-मुस्कुराता हुआ धर्म सिखाया। वे भले ही माखन चोर कहलाए, पर उन्होंने माखन की मटकियां फोडऩे के बहाने लोगों के पापों की मटकियां फोड़ डाली।
माधुर्य के देवता थे श्री कृष्ण : संतश्री ने कहा कि श्री कृष्ण माधुर्य के देवता थे। उनके रोम-रोम से मधुरता बरसती रहती थी। उनका निवास हृदयरूपी वृजधाम में रहता है। जो भी उन्हें हृदय से पुकारता है तब-तब वे अवश्य साकार होते हैं। संतप्रवर ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण और भगवान श्री नेमिनाथ दोनों चचेरे भाई थे। श्री कृष्ण को विश्ïवशांति के प्रणेता बताते हुए संतप्रवर ने कहा कि वे युद्ध के नहीं विश्ïवशांति के प्रेरक थे। उन्होंने महाभारत का युद्ध टालने के लिए भी अंतिम क्षण तक प्रयास किया। संतश्री ने कहा कि आज का युग लडऩे-लड़ाने का नहीं, प्रगति का युग है। हम जितने निकट आएंगे उतनी हमारी ताकत बढ़ेगी। अगर घर-परिवार समान में सौ तरह का त्याग करके भी शांति की स्थापना हो तो जरूर करनी चाहिए।
घर में गीता का गुटका जरूर रखें : संतश्री ने कहा कि गीता भारत की नींव है। सभी धर्मशास्त्रों का सार गीता। यह एक अकेला शास्त्र है जिसका निर्माण युद्ध भूमि में हुआ। गीता हमें एक हाथ में माला तो दूसरे हाथ में भाला रखने की प्रेरणा देती है। माला आत्म कल्याण के लिए और भाला आत्मरक्षा के लिए। संतश्री ने कहा कि गीता में अरिहंत बनना सिखाती है। हर व्यक्ïित के भीतर महाभारत मचा हुआ है। उस पर दुबुद्धि का दुर्योधन, दुर्वतियों का दु:शासन, स्वार्थ का शकुनि और घमण्ड का शिशुपाल हावी है। व्यक्ïित युद्ध करे और भीतर के इन शत्रुओं पर विजय पाए।
कर्मयोग का आह्ïवान है गीता : संतप्रवर ने कहा कि गीता की पहली प्रेरणा है व्यक्ïित कर्मयोगी बने। किसी भी कर्म को छोटा न समझें। मांगने की बजाय मेहनत का मार्ग अपनाएं। याद रखेंं, दया का दूध पीने की बजाय पुरुषार्थ का पानी ज्यादा अच्छा है। उन्होंने कहा कि व्यक्ïित हाथों में मेहंदी की बजाय मेहनत का रंग लगाए और जिंदगी भर खुशी पाना चाहता है तो कर्म से प्यार करना शुरू करे। संतश्री ने कहा कि गीता सोये आत्मविश्ïवास को जगाती है। मैं गीता का इसलिए पुजारी बना क्योंकि इसने कभी मुझे भी भय से निकालकर मेरे सोये हुए आत्मविश्ïवास को जगाया था। संतश्री ने कहा कि गीता की अंतिम प्रेरणा है प्रभु की शरण स्वीकार करे। जो व्यक्ïित अपने सभी कर्मों को प्रभु चरणों में समर्पित कर देता है प्रभु उन्हें पापों से मुक्ïत कर देते हैं। प्रवचन के पश्चात गाँधी मैदान में श्रद्धालुओं ने कृष्ण जन्मोत्सव मनाते हुए पालना झुलाया, गीता बाल संस्कार के बालक बालिकाओं ने जब गीता गायन किया तो श्रद्धालुओं ने तालियों की गडग़ड़ाहट से बच्चों का उत्साह वर्धन किया और कहा कि ऐसी संस्कार शालाएँ देश के हर शहर में होनी चाहिए।