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शिक्षा बजट में कटौती का शिक्षक संघ शेखावत ने किया विरोध

शिक्षा बजट में कटौती से समावेशी व समतामूलक शिक्षा का राष्ट्रीय लक्ष्य होगा कमजोर शिक्षा बजट में कटौती तुरन्त वापस ले सरकार, अन्यथा करना पड़े...


  • शिक्षा बजट में कटौती से समावेशी व समतामूलक शिक्षा का राष्ट्रीय लक्ष्य होगा कमजोर
  • शिक्षा बजट में कटौती तुरन्त वापस ले सरकार, अन्यथा करना पड़ेगा आन्दोलन


जोधपुर! राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के केंद्रीय बजट में शिक्षा के लिए आवंटित बजट में कटौती का पुरजोर विरोध किया है तथा इस बजट कटौती को तुरन्त वापस लेने की केंद्र सरकार से मांग की है। 
संभाग संयोजक भंवर काला ने बताया कि 1 फरवरी को माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 के केंद्रीय बजट में शिक्षा के क्षेत्र भारी कटौती की है जिससे समतामूलक, समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का राष्ट्रीय लक्ष्य कमजोर होगा। शिक्षा के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दिए जाने से शिक्षा का व्यावसायीकरण और केन्द्रीयकरण और तेज होगा। गौरतलब है कि गत 2020-21 के वित्तीय वर्ष में शिक्षा के लिए 99,312 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे लेकिन इस बजट में यह राशि बढ़ाने के बजाय घटाकर 93224 करोड़ रुपये की गई है।  इस प्रकार शिक्षा के बजट में 6088 करोड़ की भारी कटौती की गई है। यह कटौती 6 प्रतिशत से ज्यादा है। उच्च शिक्षा का बजट गत वर्ष की तुलना में 39466 करोड़ रुपये से घटाकर 38353 करोड़ रुपये कर दिया है जिसमें 1116 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। इससे विश्वविद्यालय के शिक्षकों में भी गहरा रोष है।

संभाग संयोजक भंवर काला ने चिंता प्रकट की है कि शिक्षा के निगमीकरण, व्यावसायीकरण, केंद्रीयकरण एवं साम्प्रदायिकरण को बढ़ावा देने के लिए संसद में विमर्श किये बिना गैर-लोकतांत्रिक व मनमाने तरीके से लागू की गई 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के मानकों के मुताबिक 15000  स्कूल तैयार किये जाएंगे।एनजीओ, प्राइवेट स्कूल एवं राज्य सरकारों के सहयोग से 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित किये जाएंगे। उच्चतर शिक्षा आयोग के गठन के लिए कानून लाया जाएगा।  विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग व सांठगांठ से दोहरी उपाधि एवं संयुक्त उपाधि प्रदान करने के लिए व्यवस्था की  जाएगी, इससे शिक्षा का व्यावसायीकरण और तेज होगा, जिससे आमजन के बेटा बेटी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संवैधानिक अधिकार से वंचित होते चले जायेंगे।
जिलाध्यक्ष भवानी सिंह फड़क ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि स्कूल शिक्षा के लिए गत वित्तीय वर्ष के बजट को 59845 करोड़ रुपये से घटाकर इस वर्ष यह 54873 कर दिया है। स्कूल शिक्षा बजट में 4972 करोड़ रुपये की कटौती की गई है,जो स्वीकार्य नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा मिशन का बजट भी 39161 करोड़ रुपये से घटाकर 34300 करोड़ रुपये कर दिया है।
इसी प्रकार मिड डे मील के लिए पिछले वर्ष कुल व्यय 12900 करोड़ रुपये से घटाकर 11500 करोड़ रुपये कर दियाज्ञ है। शिक्षा सशक्तिकरण के लिए गत वर्ष के बजट 2530 करोड़ से घटाकर 2381करोड़ रुपये कर दिए हैं। सामाजिक कल्याण के लिए बजट 53876 करोड़ रुपये से घटाकर 48460 रुपये कर दिया है। इसमें 5416 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। 
जिलामंत्री ऋतुराज पारीक ने बताया कि असल में बजट में भी कोविड 19 की महामारी की आपदा को शिक्षा के बाजारीकरण को बढ़ावा देने के अवसर में तब्दील करने के प्रयास दिख रहे हैं। शिक्षा बजट में कटौती से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े छात्र,शिक्षक एवं जागरूक नागरिक जनों में विशेष रोष है। संगठन लोकतांत्रिक, वैज्ञानिक, सेक्युलर, समावेशी, समतामूलक शिक्षा के संवैधानिक लक्ष्य के लिए बेहद जरूरी सार्वजनिक शिक्षा को कमजोर करने वाली सरकार की हर कोशिश का विरोध करता है।  
संभाग संयोजक भंवर काला, संभाग सहसंयोजक त्रिलोकराम नायल, जिलाध्यक्ष भवानी सिंह, जिलामंत्री ऋतुराज पारीक ने चेतावनी देते हुए कहा कि शिक्षा बजट में की गई कटौती को सरकार वापिस करे अन्यथा संगठन को मजबूर होकर आन्दोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।