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पर्यावरण दिवस विशेष🌱💚हरित संकल्पों की मुस्कान : धनराज बाकरेचा और उनकी सेवा यात्रा

          अरुण माथुर वरिष्ठ पत्रकार             धरती की धड़कनों को सुनने वाले कुछ लोग होते हैं — वो जो हर पत्ते की स...


          अरुण माथुर वरिष्ठ पत्रकार
           
धरती की धड़कनों को सुनने वाले कुछ लोग होते हैं — वो जो हर पत्ते की सरसराहट में जीवन का संगीत पहचानते हैं, हर पौधे में भविष्य की छाया देखते हैं। ऐसे ही एक पर्यावरण-पथिक हैं धनराज बाकरेचा, जिनकी अगुवाई में मुस्कान सच्ची सेवा समिति पिछले एक दशक से जोधपुर की रेत में हरियाली की कविताएं लिख रही है।
यह कोई साधारण सेवा नहीं — यह एक सच्चा प्रण है।
मानो तपती मरुस्थली मिट्टी से वे कहते हों – "तू बस विश्वास कर, हम तुझे छाया देंगे, फल देंगे, जीवन देंगे!" और मिट्टी मुस्कुरा उठती है, जब वहां 5000 से अधिक पौधों की जड़ें उम्मीद की तरह पसर जाती हैं और समय के साथ वे वृक्षों में बदल कर एक सजीव आश्रय बन जाते हैं — इंसानों, पशुओं और पक्षियों के लिए।
इन वृक्षों की हर शाखा में किसी का जन्मदिन, किसी की स्मृति, किसी की प्रार्थना फलीभूत होती है। यहां हर पौधा केवल हरियाली नहीं, एक कहानी है — सेवा की, स्नेह की, और सतत समर्पण की।
"हरियाला हाईवे योजना" — ये कोई सरकारी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आने वाले कल की छांव है। मथानिया रोड पर 8 सालों से लगाए जा रहे ये वृक्ष एक दिन रामदेवरा के पैदल यात्रियों को छाया में विश्राम का वरदान देंगे। वो पथिक, जिनके कदमों में श्रद्धा है, उन्हें बाकरेचा की टीम ने हरियाली की सौगात दी है।
स्कूल हो या शमशान, गोचर हो या गौशाला, समिति के सेवक वहां पौधा लगाते हैं, जहां जीवन की जरूरत है — चाहे वो जीवन शुरू हो रहा हो, समाप्त हो रहा हो, या संघर्ष कर रहा हो।
ये कोई पेड़ लगाने वाली संस्था भर नहीं — ये तो एक चलती-फिरती "हरित क्रांति" है। इनके प्रयासों से पशु-पक्षी, सरीसर्प भी अपने प्राकृतिक आवास पा रहे हैं। जलकुंड बन रहे हैं, रेडियम की पट्टियाँ वाहनों में चेतना बाँट रही हैं, और मातृशक्ति को आत्मरक्षा का बल मिल रहा है।
जहाँ शहरों की भीड़ में लोग अपने लिए ऑक्सीजन खोज रहे हैं, वहीं मुस्कान सच्ची सेवा समिति पूरे शहर को साँस लेने का सलीका सिखा रही है।
धनराज बाकरेचा और उनकी टोली कोई पुरस्कार नहीं चाहते, क्योंकि उन्हें हर उस पौधे की छांव में सुकून मिलता है, जो उनके हाथों से रोपा गया हो।
सचमुच, ये वृक्ष केवल जड़ें नहीं फैलाते — ये भावनाओं की शाखाएं हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को सिखाएँगी कि —
"जहाँ सेवा है, वहीं जीवन है। और जहाँ जीवन है, वहाँ हरियाली संभव है।"