जोधपुर। बाल्यकाल में स्कूलों में कराया जाने वाला अध्यापन नवाचार और रोचकपूर्ण होने के साथ फिल्मांकित कर दिखाया जाता है तो पाठ की विषय-वस्तु ...
जोधपुर। बाल्यकाल में स्कूलों में कराया जाने वाला अध्यापन नवाचार और रोचकपूर्ण होने के साथ फिल्मांकित कर दिखाया जाता है तो पाठ की विषय-वस्तु बच्चों के मन मस्तिष्क में एक तस्वीर के रूप में स्थायी जगह बना लेती है, इस प्रकार के नवाचारों को विद्यालयों में बार-बार किये जाने चाहिये, यह वक्तव्य तीन दिवसीय बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान गैर आवासीय ब्लॉक स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर धवा मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार जाणी ने दिये।
प्रशिक्षण शिविर में धवा प्रधानाचार्य सुरजीत पूनिया ने कहा कि प्रशिक्षण शिविरों की उपयोगिता तभी साकार होगी, जब संभागियों द्वारा शिक्षण के दौरान उनके सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए दक्ष-प्रशिक्षकों और अपने संभागी साथियों के बीच आपस में साझा करें और उन पर मंथन करें। शिविर व्यवस्था में व्याख्याता पारसमल सिंघवी, शिविर प्रभारी व व्यवस्थापक श्रीराम विश्नोई, हरीश विश्नोई, गौरी शंकर व रमेश चन्द्र पटेल का विशेष सहयोग रहा।पूर्व एसआरजी शौकत अली लोहिया ने बताया कि दक्ष प्रशिक्षक सतवीर जाट, मनजीत सिंह, प्रेमराज विश्नोई, राजेन्द्र कुमावत, बजरंग कुमावत, कृतिका डांगा, प्रियंका तंवर सहित अन्य दक्ष-प्रशिक्षकों द्वारा एससीएफ, बहुभाषिता गणित, अंग्रेजी और बुनियादी साक्षरता के घटकों मौखिक भाषा विकास, ध्वनि जागरुकता और डिकोडिंग पर वीडियो पीपीटी से संभागियों के साथ विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सम्पन्न करवाया। रूम टू रीड से ब्लॉक कोडिनेटर रविशंकर ने बहुभाषिता और बुनियादी साक्षरता के सत्रों में अकादमिक मदद की। प्रशिक्षण में पूर्व एसआरजी शौकत अली लोहिया की परिकल्पना पर नवाचारों व रोचकता के साथ अध्ययन-अध्यापन की विषय वस्तु पर आधारित हिन्दी के पाठ ‘‘गुरुभक्त काली बाई’’ व द्वारकाधीश श्रीकृष्ण व सुदामा के बाल्यकाल में गुरुकुल शिक्षा पर पर्यावरण अध्ययन के पाठ ‘‘मित्रता’’ का प्रसारण प्रोजेक्टर के माध्यम से किया गया। शिक्षण कार्य में किये गये नवाचारों के लिए अधिकारियों, दक्ष-प्रशिक्षकों व संभागियों द्वारा शिक्षकों की प्रशंसा की गई। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे महत्वपूर्ण हैं कि शिक्षकों द्वारा निपुण भारत मिशन के तहत पढ़ाने के तरीको में बदलाव किया जा रहा है, जो सराहनीय प्रयास है। प्रशिक्षण में अकादमिक सहयोग देने के लिए रूम टू रीड को धन्यवाद दिया। सभी विद्यालयों में पुस्तकालय (पठन कोना) बनाने पर बातचीत की गई एवं रीडिंग पीरियड की अवधारणाओं पर बातचीत की गई।
